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अभिनय मेरा पहला प्यार है

 

 

नृत्यकला हमेशा मेरे लिए हमेशा बोनस प्वाइंट रही है : दीक्षा जायसवाल

 

छत्तीसगढ़ी फिल्मों की उभरती हुई अभिनेत्री दीक्षा जायसवाल से गुरबीर सिंघ चावला की विशेष मुलाकात

दीक्षा जायसवाल

एक्टर एव्ँ क्लासिकल डांसर

 

एक्टिंग के अपने प्रारंभिक सफर के बारे में कुछ बताईए। एक्टिंग की यह रुचि आपके विरासत से मिली या आपके दिल की आवाज़ थी?

 

कला के क्षेत्र में मैंने पहला कदम क्लासिकल कथक डांस से रखा था, जब तीन साल की थी अब मुझे 15 साल हो गए कथक करते हुए , मैंने वेस्टर्न डांस का कोर्स, एक्टिंग कोर्स, थिएटर और सिंगिंग भी की है। एक्टिंग करना मेरे दिल की ही आवाज़ थी। मेरे पिता को अपने जमाने में अभिनेता बनने का शौक था, लेकिन कुछ कारणों से वे ऐसा नहीं कर पाए।अब उनका सपना मैं पूरा कर रही हूं। मुझे इस बात की बेहद खुशी है।

 

क्या आप मानती है कि एक्टिंग और संवाद अदायगी के लिए एक्टिंग ट्रेनिंग कोर्स की जरूरत होती है। आपने अभिनय की ट्रेनिंग कहां से ली?

 

ऐसा जरूरी नहीं है कि अभिनय के लिए कोर्स करना ज़रूरी हैं। यह आपके रुचि पर निर्भर करता है। आप जितना काम कर सकें उतना अच्छा है अगर आपके अंदर समर्पण, ज़ुनून है तो आप अपने टैलेंट को साबित करने कर सकते हैं। ट्रेनिंग कोर्स से अपनी कला को बेहतर और लेवल अप करने में मदद जरूर मिलती है। सीखना और ज्ञान कभी खत्म नहीं होता उसी तरह हम भी अपने आप को चुनौती देकर अपनी कला को निरंतर निखार सकते हैं।

आपकी पहली फ़िल्म कौन सी थी, जिसने आपको एक एक्टर के रूप में पहचान दी?

 

मेरी पहली डेब्यू फिल्म बी. ए फाइनल ईयर है। इस फिल्म से मुझे सीजी इंडस्ट्री में एक बड़ा आधार मिलेगा। प्रणव झा फिल्म प्रोडक्शन एक बड़ा बैनर है और यह फिल्म एक सीक्वल है। मैं प्रणव जी को धन्यवाद कहना चाहती हूं कि उन्होंने मुझ पर विश्वास किया और मुझे अपनी कला को प्रदर्शित करने का अवसर दिया। इसमें मैं जो कैरेक्टर कर रही हूं फिल्म में वो बिल्कुल ही मेरे असली नेचर से विपरीत है। इसने मुझे खुद को चुनौती देने और कई तरीकों से खुद को परखने का मौका भी दिया है। अपने इस किरदार के साथ मैने पूरा न्याय करने की कोशिश की है।

 

कितनी छत्तीसगढ़ी फिल्मों में आप काम कर चुकी हैं, कैसा अनुभव रहा आपका?

 

मैंने अब तक 6 फिल्मों में काम किया है और मैं बेहद खुश हूं कि हर प्रोजेक्ट बेहतरीन रहा और वह भी इस इंडस्ट्री के प्रतिभाशाली निर्देशकों के साथ। मैंने इन सभी लोगों के साथ काम करते हुए अलग-अलग चीजें सीखी हैं और अनुभव प्राप्त किया है।

मेरे द्वारा अभिनीत फिल्में हैं

 

बी ए . फाइनल ईयर

निर्देशक – प्रणव झा जी

 

मोर छैंहा भुइयां 2

निर्देशक-सतीश जैन जी

 

डार्लिंग प्यार झुकता नहीं 2

निर्देशक- भारती वर्मा जी

 

सुकवा

निर्देशक-मनोज वर्मा जी

 

आखिरी फैसला

निर्देशक – आदिश कश्यप जी

 

सोनझारी

निर्देशक-शुभम कोशले जी

 

मैंने अपने करियर की शुरुआत में कुछ सीजी गाने किए थे और फिर मेरी मुलाकात प्रणव झा जी से हुई। उन्होंने मुझे एक एल्बम सॉन्ग में मौका दिया। मेरा लुक टेस्ट हुआ ऑडिशन हुआ और यह मेरे लिए एक अवसर बन गया। फिर उन्होंने मुझे फिल्म के लिए साइन किया।

छत्तीसगढ़ फिल्म उद्योग काई मायनों में बढ़ रही है। यह सिलसिला 20 साल पहले शुरू हुआ था । तब से आज तक बहुत बड़ा अंतर आया है और हमारी इंडस्ट्री ने एक अलग जगह बनाई है | चाहे वो तकनीक या गुणवत्ता की बात हो या अवसर हो। हमारी संस्कृति, हमारी बोली हमारे तौर तरीके जो हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। सभी लोग बढ़ चढ़ के अपनी कला के साथ काम के रहे हैं और उम्मीद है आने वाले समय में हम सभी मिलकर और नई ऊंचाइयां हासिल करेंगे।

 

आपने अभी तक अपने अभिनय कैरियर की जितनी भी भूमिकाएं अभिनीत की है उन्हें आपने अपनी अभिनय दक्षता से पूरी तरह से जीवंत करने का प्रयास किया है। इसका श्रेय आप निर्देशक को देना चाहेंगी या अपने टैलेन्ट को?

 

किसी भी सफल किरदार या प्रोजेक्ट के पीछे सभी का सहयोग होता है। चाहे वो लाइट डिपार्टमेंट , कैमरा, मेकअप, लोकेशन और सबसे बढ़कर कलाकार और निर्देशक। जितना अधिक हम अपने निर्देशक की बात समझ पाएंगे और चरित्र को आत्मसात करेंगे उतना बेहतर कर पाएंगे। आपको बेहतर होते रहने का अभ्यास करना चाहिए और अपने आप को अलग अलग किरदार में अपने तरीके से ढालना आना चाहिए।

 

आपकी नई छत्तीसगढ़ी फ़िल्म “ मोर छईयां भुईयां 2” प्रदर्शन से पूर्व बहुत चर्चित हो गई है। यह फ़िल्म आपके लिए कितनी चैलेजिंग रही?

 

मोर छैंहा भुइयां 2 फिल्म मेरे करियर का एक बहुत बड़ा आधार है। जब इसका पहला सीक्वल रिलीज़ हुआ था तब मैं पैदा भी नहीं हुई थी। इस फिल्म के निर्देशक सतीश जैन जी अपने आप में एक ब्रांड है। इस फिल्म में काम करना सिर्फ मेरा ही नहीं बल्कि हर कलाकार का सपना रहा है। सभी लोगों ने अपना प्यार दिया है। उत्साह के साथ हमारे लिए विश्वास और चुनौती आती है कि हम इसके नाम को बरकरार रखें और सतीश जी ने हमें इस काबिल समझा, यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है। मैं सुधा की भूमिका निभा रही हूं। मैं ज्यादातर चंचल चुलबुली रहती हूं, इसलिए यह मेरे लिए चुनौतीपूर्ण था कि हम अपने किरदार में अपने आप को ढालें, सतीश जी और टीम ने हमेशा मेरा समर्थन किया और मुझे और बेहतर बनाने में मदद की। फ़िल्म की शूटिंग मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगी।

 

मोर छईया भूईआं 2” के कलाकारों के साथ काम करने का कैसा अनुभव रहा। इस फ़िल्म में आप सबसे ज्यादा किस कलाकार से प्रभावित हुई?

 

“मोर छैंहा भुइयां 2” के कलाकारों के साथ काम करना बेहतरीन रहा है। जब भी हमें खाली समय मिलता था तो सतीश सर, मान, दीपक, एल्सा और मैं सभी मिलकर लूडो खेल लेते थे। गुणवत्तापूर्ण समय ने हमें करीब ला दिया और हम हमेशा मौज-मस्ती का माहौल रहा।हमारा एक साथ काम करना इतना सहज हो गया कि पता ही नहीं चला कि कब शूटिंग पूर्ण हो गई।। मैं उस समय को हमेशा याद रखूंगी और इसे हमेशा एक स्मृति के रूप में संजोकर रखूंगी |

 

निर्देशक सतीश जैन से आपको कितना सीखने को मिला। अन्य फिल्म निर्देशकों और सतीश जैन के स्टाइल में आपको क्या अंतर मिला?

 

हमारी इंडस्ट्री के बेहद प्रतिभाशाली निर्देशक सतीश जैन जी के बारे में जितना कहूं उतना कम है। उनसे जुड़ने से पहले मैं डर गई थी क्योंकि लोगों ने कहा था कि वह सख्त मिजाज़ के हैं। वे वह अपनी कला के प्रति भावुक, समर्पित रहते हैं। अपनी हर फ़िल्म के लिए सर्वोत्तम परिणाम देते हैं। उनसे मिलने और उनके साथ काम करने के बाद मुझे पता चला है कि वे प्यारे और विनम्र इंसान हैं। मैंने उनसे बहुत सी चीजें सीखी हैं जो मेरे करियर में हमेशा मार्गदर्शन करती रहेंगी। वे दर्शकों की पसंद को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता देते। वे हमेशा लोगों के दिलों में अपनी कहानी को जीवित रखने में कामयाब रहते हैं। ऐसे ही मैंने जितने भी निर्देशकों के साथ काम किया सभी के स्टाइल अलग-अलग हैं। हर किसी की सोच और विचार उनका कंटेंट ही सबकी अपनी अलग पहचान बनाता है। विभिन्न निर्देशकों से हमें मनोरंजक, ज्ञानवर्धक, संदेशात्मक, संगीतमय पैकेज मिलता है। किसी की किसी से तुलना नहीं करनी चाहिए क्योंकि सभी अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करते हैं।

 

फिल्म की स्क्रीन पर जब आप अपने किरदारों को देखती हैं तो आपके कैसे इमोशन्स होते हैं?

 

मेरी फिल्में रीलीज होने का अब समय आ गया है। मैं बहुत उत्साहित हूं और इंतजार कर रही हूं। जहां तक काम करने का अनुभव है तो मैं अपने आप को अलग अलग किरदारों में ढाल सकती हूं। हर किरदार मेरे लिए बहुत मायने रखता है क्योंकि अभिनय मेरा पहला प्यार है। आशा है दर्शको का प्यार भी मुझे मिलेगा।

एक एक्टर के रूप में आप इन दिनों बहुत पापुलर हैं। एक्टिंग की फील्ड में प्रतिस्पर्धा को किस रूप में स्वीकार करती हैं। आपकी प्रतिस्पर्धा किससे है?

 

अभिनय के क्षेत्र में मैंने अभी काम शुरू किया है और वरिष्ठ कलाकारों का बहुत सम्मान करती हूं और मैं उन सब को एक आदर्श के रूप में देखती हूं। मैं अपनी प्रतिस्पर्धा किसी से नहीं मानती क्योंकि सबके बीच में काम करने की एक अलग खूबसूरती होती है और ग्रेस रहता है। मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है। यह तो सफ़र की शुरुआत है।

 

फिल्म इंडस्ट्री में एक्टर के रूप में अपनी पहचान बनाने के लिए आपको कितना स्ट्रगल करना पड़ा? आपकी पहचान बनाने में आपके माता पिता का कितना योगदान है?

 

मैंने बचपन से ही अपने ऊपर काम करना शुरू कर दिया था, इसमें मेरे माता-पिता का बहुत बड़ा सहयोग रहा है। उन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया, मेरी कला को तराशने के लिए सदैव प्रयासरत रहते हैं और मुझ पर, मेरे टैलेंट पर विश्वास करते हैं। उनका हमेशा से मानना रहा है कि जो कड़ी मेहनत करता है और अपनी कला पर भरोसा रखता है, वह अपने लक्ष्य तक अवश्य ही पहुंचता है। मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे ऐसे माता पिता मिले।

 

आप एक अच्छी क्लासिकल डांसर भी हैं। एक एक्टर का पारंगत डांसर होना उसके प्रोफेशनल कैरियर के लिए कितना जरूरी आप मानती हैं?

 

नृत्य हमेशा मेरे लिए एक बोनस प्वाइंट रहा है। यह वास्तव में महत्वपूर्ण है कि एक एक्टर को नृत्य आना चाहिए। यह कला आप कभी भी सीख सकते हैं और अपने आप को बेहतर कर सकते हैं। एक कलाकार के लिए उसकी कला ही मायने रखती है और उनको शीर्ष पर ले जाती है। ठीक उसी तरह जैसे कथक ने मुझे अभिव्यक्ति में बेहतर होने और नवरस को समझने में मदद की है।

 

आपकी एक्टिंग में कोई कमियां निकालता है तो आपका कैसा रिएक्शन होता है। अपनी आलोचना को किस रूप में आप स्वीकारती हैं?

 

एक कलाकार के लिए सीखना आजीवन ख़त्म नहीं होता। जब भी मुझे कोई मेरी गलतियाँ बताता है तो मैं उसे स्वीकार करती हूँ और अपने हुनर को संवारने का प्रयास करती हूं।

आपकी आकर्षक मुस्कान और फिटनैस की राज क्या है?

 

यह मुस्कान तो मुझे अपनी मम्मी से विरासत में मिली है। फिटनेस, डांसिंग एक्सर्साइज़ और योगा के कारण बरकरार है, सात्विक आहार लेना ,ध्यान और सकारात्मक सोच से व्यक्तित्व में निखार बना रहता है।

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